नवरात्रि के दूसरे दिन मंगलवार को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की गई ।

मां दुर्गा प्रतिमा 


बस्ती। मंदिरों और घरों में भक्तों ने श्रद्धा से मां की आराधना की। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप तप, संयम और त्याग का प्रतीक माना जाता है।

'ब्रह्म' का अर्थ तपस्या और 'चारिणी' का अर्थ आचरण करना होता है। इसलिए उन्हें साधना और आत्मबल की देवी कहा जाता है। भक्त इस दिन विशेष पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

पूजा विधि में सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहने जाते हैं। फिर मां की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर पूजन शुरू किया जाता है। मंत्रोच्चार के साथ पुष्प अर्पित किए जाते हैं। मां को चीनी, मिश्री, पंचामृत और दूध से बने व्यंजन भोग के रूप में चढ़ाए जाते हैं।

मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की उपासना से जीवन में तप और संयम की शक्ति मिलती है। कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता बढ़ती है। सच्चे मन से की गई पूजा से सफलता और समृद्धि प्राप्त होती है।

धार्मिक पंचांग के अनुसार, नवरात्रि के दूसरे दिन का पूजन प्रातःकाल से लेकर पूरे दिन तक किया जा सकता है। नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के हर स्वरूप की अलग महिमा है। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और उन्नति का मार्ग खुलता है।
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