दिलीप कुमार। बस्ती।
बस्ती। जिले के सदर विकासखंड अंतर्गत रतनपुर अर्जुन गांव की रहने वाली 23 वर्षीय सुमन चौधरी सरकारी अभिलेखों में खुद को जीवित साबित करने के लिए प्रशासनिक और कानूनी लड़ाई लड़ने को मजबूर हैं। परिवार रजिस्टर में हुई कथित गंभीर त्रुटि के कारण उन्हें अपने अधिकारों और सरकारी कार्यों में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, सुमन चौधरी का जन्म 17 अगस्त 2002 को हुआ था। आरोप है कि 17 मई 2017 को तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी द्वारा परिवार रजिस्टर (भाग-1) में उन्हें 'मृत' तथा 'निरक्षर' दर्ज कर दिया गया। जबकि सुमन पूरी तरह जीवित हैं और वर्ष 2019 में उन्होंने हाईस्कूल की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की थी।
सरकारी रिकॉर्ड में गलत प्रविष्टि होने के कारण सुमन को कई महत्वपूर्ण कार्यों में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि इस गलती की वजह से पिता की संपत्ति में अधिकार दर्ज कराने, विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, पहचान संबंधी दस्तावेज बनवाने तथा अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगातार परेशानी हो रही है। उनका आरोप है कि रिकॉर्ड की इस त्रुटि से उनके कानूनी और मौलिक अधिकार भी प्रभावित हुए हैं।
इसी मामले को लेकर सुमन चौधरी ने बस्ती जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रार्थना पत्र सौंपा है। उन्होंने मांग की है कि परिवार रजिस्टर में दर्ज 'मृत' की प्रविष्टि को हटाकर उन्हें 'जीवित' तथा 'निरक्षर' के स्थान पर 'साक्षर' दर्ज किया जाए। साथ ही इस गंभीर लापरवाही अथवा संभावित साजिश के लिए जिम्मेदार तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी और संबंधित कर्मचारियों की निष्पक्ष जांच कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
अब यह मामला प्रशासन के संज्ञान में है। लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद प्रशासन रिकॉर्ड में सुधार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।
