बस्ती, 20 जून 2025। कलवारी मार्ग पर स्थित कुसौरा बाज़ार और आसपास के गांवों में छुट्टा जानवर किसानों और आमजन दोनों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। खेतों में फसल चरने से जहां किसान बर्बादी झेल रहे हैं, वहीं अब ये जानवर राष्ट्रीय राजमार्ग-28 पर भी डेरा जमाए दिखाई देने लगे हैं। दर्जनों की संख्या में छुट्टा गौवंश रोजाना हाईवे पर घूमते रहते हैं, जिससे कभी भी सड़क हादसे की आशंका बनी रहती है।
शेखपुरा निवासी अभिषेक कुमार का कहना है कि छुट्टा सांड और नीलगाय लगातार खेतों को नुकसान पहुँचा रहे हैं। "जहाँ पाँच कुंतल अनाज होना चाहिए, वहाँ मुश्किल से दो कुंतल ही हो पाता है," उन्होंने कहा। धान की पौध और गन्ने की फसल को इन जानवरों ने बुरी तरह चर डाला है।
शत्रुघ्न चौधरी ने बताया कि उनके खेत को सबसे अधिक क्षति छुट्टा जानवरों ने ही दी है। "अक्सर ये रात में खेत में घुसकर फसल रौंद देते हैं। कई बार खेत में गए ग्रामीणों पर भी हमला कर देते हैं," उन्होंने कहा।
ट्री इनिशिएटिव्स सोसाइटी के सदस्य और क्षेत्रीय गन्ना किसान प्रतिनिधि रामकृष्ण पटेल ने बताया कि उन्होंने कई बार जिला प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराया है, शिकायतें भी दर्ज कराई गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
पड़री, शेखपुरा, बेलवाडाड़, बाघौड़ा, सोनबरसा और कनैला समेत कई गांवों के किसान इस समस्या से जूझ रहे हैं। किसानों का कहना है कि न केवल खेत बल्कि अब NH-28 भी छुट्टा गौवंश का अघोषित आश्रय स्थल बन गया है। कुसौरा बाज़ार के पास हाईवे पर दर्जनों गौवंश घूमते देखे जा सकते हैं, जिससे कभी भी गंभीर दुर्घटनाएँ हो सकती हैं।
ग्रामीणों और किसानों की मांग है कि इन छुट्टा जानवरों को गौ-आश्रय स्थल या सरकारी चारागाहों में भेजा जाए, जहाँ उनके भोजन-पानी की समुचित व्यवस्था हो सके। "यह जानवरों के लिए भी बेहतर होगा और किसानों के साथ-साथ राहगीरों की सुरक्षा के लिए भी ज़रूरी है," किसानों ने कहा।
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