सामुदायिक शौचालय बदहाली का शिकार, आस्था स्थल पर अव्यवस्थाओं से श्रद्धालु परेशान

दिलीप कुमार | बहादुरपुर बस्ती | 16 दिसंबर 2025

जनपद बस्ती के विकासखंड बहादुरपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत गोबिंदापुर स्थित महुआडाबर में सैयद अब्दुल लतीफ शाह बाबा मजार के बगल में बना सामुदायिक शौचालय अपनी बदहाल स्थिति को लेकर चर्चा में है। आस्था के इस प्रमुख केंद्र पर बने शौचालय की स्थिति इतनी निंदनीय बताई जा रही है कि श्रद्धालुओं को मजबूरी में खुले में शौच तक करना पड़ रहा है।

सैयद अब्दुल लतीफ शाह बाबा की मजार को हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग गहरी आस्था और विश्वास का केंद्र मानते हैं। यहां लोग अपनी मनोकामनाओं के साथ दुख–पीड़ा लेकर पहुंचते हैं। प्रत्येक बृहस्पतिवार को मजार पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले लोगों के लिए सामुदायिक शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा बेहद आवश्यक है, लेकिन वर्तमान हालात में यह सुविधा स्वयं परेशानी का कारण बन गई है।

जियारत के लिए आए फरहान खान ने बताया कि जब वे शौचालय गए तो अंदर फैली गंदगी देखकर उन्हें नाक बंद करनी पड़ी। उन्होंने बताया कि शौचालय की हालत इतनी खराब थी कि मजबूरी में खुले में शौच करना पड़ा, जो सरकार की स्वच्छता मुहिम पर सवाल खड़ा करता है। वहीं ग्राम चरकेला निवासी वृद्ध अब्बुलहसम ने कहा कि उनके लिए दूर जाकर खुले में शौच करना बेहद मुश्किल है, लेकिन शौचालय की गंदगी के कारण वे उसका उपयोग नहीं कर सके। उनका कहना है कि यहां नियमित सफाई नहीं होती और कोई देखने वाला नहीं है।

अब्बास पठान ने शौचालय निर्माण में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधान द्वारा अधूरा काम कराया गया है। कई स्थानों पर टोटी तक नहीं लगी है और हाथ-पैर धोने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे श्रद्धालुओं को भारी असुविधा होती है।

इस मामले में ग्राम प्रधान नूर मोहम्मद से फोन पर बातचीत की गई। उन्होंने बताया कि केयर टेकर सफीकुन निशा द्वारा रोजाना साफ-सफाई की जाती है, लेकिन बृहस्पतिवार को भीड़ अधिक होने के कारण गंदगी बढ़ जाती है। उन्होंने समस्या के समाधान का आश्वासन भी दिया।

फिलहाल, आस्था के इस प्रमुख स्थल पर बनी सरकारी सुविधा की बदहाली ने स्वच्छ भारत मिशन और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रद्धालुओं ने मांग की है कि शौचालय की तत्काल मरम्मत, पूर्ण निर्माण और नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि आस्था स्थल पर आने वाले लोगों को सम्मानजनक और स्वच्छ सुविधा मिल सके।


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