दरोगा अजय गौंड का पार्थिव शरीर घर पहुंचते ही रो पड़ा मुड़ाडीह गांव, टूटा परिवार, गूंजती रहीं चीखें


देवरिया। बस्ती जिले में तैनात रहे दरोगा अजय कुमार का पार्थिव शरीर सोमवार की रात जैसे ही पैतृक गांव देवरिया के मुड़ाडीह पहुंचा, पूरा गांव शोक में डूब गया। शव पहुंचते ही घर में कोहराम मच गया। परिजनों की चीख-पुकार सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं। गांव की गलियों में सिर्फ विलाप की आवाजें गूंजती रहीं।
     मुड़ाडीह निवासी रामचंद्र के द्वितीय पुत्र अजय कुमार वर्ष 2016 में उत्तर प्रदेश पुलिस में दरोगा बने थे। वर्तमान में उनकी तैनाती बस्ती जिले में थी। चार दिन पहले वह थाने से अचानक लापता हो गए थे। रविवार की शाम उनका शव अयोध्या बॉर्डर पर सरयू नदी से बरामद हुआ। सोमवार की शाम छोटे भाई, पीसीएस अधिकारी अरुण कुमार जब शव लेकर गांव पहुंचे तो माहौल गमगीन हो गया। पुत्र का शव देखते ही वृद्ध पिता रामचंद्र फूट-फूटकर रोने लगे और बार-बार अचेत हो जा रहे थे। उनका दर्द देख वहां खड़ा हर व्यक्ति अपने आंसू नहीं रोक सका। पत्नी रंजिता पति के शव से लिपटकर रोती रहीं। बड़े भाई दिलीप कुमार और छोटे भाई अरुण कुमार की आंखों से भी आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। चचेरी बहन प्रीति का भी रो-रोकर बुरा हाल था।
     दरोगा अजय के चचेरी बहन प्रीति की 20 फरवरी को शादी तय थी। घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं, फर्नीचर और जरूरी सामान भी खरीदे जा चुके थे। अजय और अरुण दोनों शादी में शामिल होने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अजय का बहन की शादी में शामिल होने का सपना अधूरा ही रह गया। भाई की याद में प्रीति बार-बार बेसुध हो जा रही थी।
    अजय के निधन का गम सिर्फ परिवार तक सीमित नहीं रहा। पूरे मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई। शव मिलने की खबर के बाद से कई घरों में चूल्हे नहीं जले। गलियां सूनी पड़ी रहीं। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि अजय कुमार बेहद मिलनसार और सरल स्वभाव के थे। छुट्टी में जब भी गांव आते, हर किसी से आत्मीयता से मिलते थे। देर रात परिजन पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए बरहज के गौरा घाट लेकर रवाना हो गए। गांव की आंखें नम थीं और हर दिल में बस एक ही सवाल इतनी हंसती-खेलती जिंदगी यूं अचानक कैसे थम गई।
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