चाँद मस्जिद बैराड़ी में तरावीह में कुरआन शरीफ़ मुकम्मल, इंसानियत और शिक्षा का दिया संदेश


दिलीप कुमार | 8 मार्च 2026


बस्ती जनपद के मोज़ा बैराड़ी मुसतहकम स्थित चाँद मस्जिद में रमज़ान के मुकद्दस महीने की 17वीं रमज़ान की रात और 18वीं तरावीह में कुरआन शरीफ़ मुकम्मल होने पर रूहानी माहौल देखने को मिला। इस मौके पर मस्जिद परिसर में बड़ी संख्या में नमाज़ी मौजूद रहे और सभी ने मिलकर देश-दुनिया में अमन, शांति और भाईचारे के लिए दुआ की।


इस वर्ष चाँद मस्जिद में तरावीह की नमाज़ के दौरान कुरआन शरीफ़ सुनाने की जिम्मेदारी लखनऊ से तशरीफ लाए आलिम-ए-दीन मुफ़्ती उमर फारूक क़ासमी बुलंदशहरी ने निभाई। उन्होंने पूरे रमज़ान में तरावीह के दौरान कुरआन शरीफ़ सुनाया और मुकम्मल होने के बाद लोगों के सामने एक प्रभावशाली बयान भी पेश किया।


अपने बयान में उन्होंने कहा कि कुरआन शरीफ़ केवल मुसलमानों के लिए ही नहीं बल्कि पूरी इंसानियत के लिए मार्गदर्शक किताब है। यह इंसान को सच्चाई, न्याय, भलाई, सेवा और आपसी भाईचारे का रास्ता दिखाता है। उन्होंने कहा कि कुरआन को सिर्फ पढ़ना ही काफी नहीं है बल्कि उसे समझकर अपनी जिंदगी में उतारना भी उतना ही जरूरी है।


मुफ़्ती साहब ने समाज में शिक्षा की अहमियत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज का दौर ज्ञान और शिक्षा का दौर है और बिना पढ़ाई के किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने इस्लाम की पहली वह्यी “इक़रा बिस्मि रब्बिकल्लज़ी ख़लक” का जिक्र करते हुए बताया कि इसका अर्थ है पढ़ना और ज्ञान प्राप्त करना। इसलिए हर माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाएं।


उन्होंने बच्चों की अच्छी परवरिश और संस्कारों पर भी जोर दिया तथा कहा कि लड़कों के साथ-साथ लड़कियों की शिक्षा भी बेहद जरूरी है, ताकि वे अपने परिवार, समाज और धर्म के मूल्यों की रक्षा कर सकें।


कार्यक्रम के दौरान स्थानीय नौजवान कमेटी की ओर से नमाज़ियों के लिए मिठाई और पानी का भी इंतज़ाम किया गया। व्यवस्था में वाजिद भाई, अब्दुर्रहीम भाई (डड़वा निवासी), मौलाना तल्हा साहब (सदर मुदर्रिस), शमीम उर्फ गुड्डू भाई, आज़म भाई और नज़्म भाई समेत कई लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


मस्जिद के इमाम हाफिज़ मोहम्मद नौशाद साहब ने ईशा की नमाज़ अदा कराई। वहीं कुरआन शरीफ़ मुकम्मल होने के बाद डॉ. हादी अलवरा ने अपने घर पर मुफ़्ती उमर फारूक क़ासमी और अन्य उलेमा-ए-कराम की मेहमाननवाज़ी भी की।




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