दिलीप कुमार| कुदरहा बस्ती|
बस्ती। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन कई स्थानों पर योजनाएं शुरू होने से पहले ही दम तोड़ देती हैं। ऐसा ही एक मामला विकासखंड कुदरहा की ग्राम पंचायत मिश्रौलिया में देखने को मिला है, जहां लगभग ₹6.50 लाख की लागत से निर्मित सामुदायिक शौचालय पिछले चार वर्षों से उपयोग के बिना बंद पड़ा हुआ है।
ग्रामीणों के अनुसार शौचालय का निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन इसके संचालन के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था कभी नहीं की गई। सबसे बड़ी समस्या पानी की रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण के बाद से आज तक शौचालय की पानी की टंकी में पानी नहीं पहुंचा, जिसके कारण यह कभी उपयोग में ही नहीं आ सका। धीरे-धीरे भवन जर्जर होता चला गया और आज इसकी हालत खंडहर जैसी हो चुकी है।
शौचालय के अधिकांश दरवाजे टूट चुके हैं, सीटें धंस गई हैं और फर्श जगह-जगह से उखड़ चुका है। भवन की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं, जिससे इसके कभी भी गिरने का खतरा बना हुआ है। देखरेख के अभाव में पूरा परिसर कूड़ा-कचरा फेंकने का स्थान बन गया है।
ग्राम पंचायत के नागरिक प्रकाश प्रजापति, विपिन कश्यप और गुलशन राजभर का आरोप है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद जनता को इस योजना का कोई लाभ नहीं मिला। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता और योजना के संचालन को लेकर संबंधित अधिकारियों एवं जिम्मेदार लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा सामुदायिक शौचालय को पुनः संचालित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो सरकारी धन की बर्बादी का यह उदाहरण हमेशा के लिए भ्रष्ट व्यवस्था की कहानी बनकर रह जाएगा।
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