बस्ती। रामायणकालीन आस्था के प्रमुख केंद्र मखौड़ाधाम के सौंदर्यीकरण और समग्र विकास की दिशा में प्रशासनिक पहल तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने मंदिर परिसर और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं के संबंध में 14 बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी मांगी है। इन जानकारियों के आधार पर मखौड़ाधाम के विकास की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
मंगलवार को एसडीएम हर्रैया उमाकांत तिवारी ने पर्यटन अधिकारी को भेजी रिपोर्ट में बताया कि ग्राम सड़सी स्थित श्री रामजानकी मंदिर (पुत्रेष्टि यज्ञ स्थल) एक अत्यंत प्राचीन एवं ऐतिहासिक धार्मिक स्थल है। मंदिर परिसर का क्षेत्रफल 925 एअर है। इसके उत्तर में मनोरमा नदी, दक्षिण में नहर विभाग का बांध एवं पक्की सड़क, पूर्व में नाला तथा पश्चिम में कटरा-परसरामपुर मार्ग स्थित है।
रिपोर्ट में मंदिर की पौराणिक महत्ता का भी उल्लेख किया गया है। मान्यता के अनुसार, महाराजा दशरथ ने इसी स्थान पर पुत्रेष्टि यज्ञ कराया था, जिसके फलस्वरूप भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। इसी आस्था के कारण आज भी संतान प्राप्ति की कामना लेकर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां यज्ञ कराने आते हैं।
मंदिर परिसर में शिवलिंग, भगवान राम, लक्ष्मण, माता जानकी और हनुमान जी की प्रतिमाएं स्थापित हैं। चैत्र पूर्णिमा, रामनवमी, अक्षय तृतीया, दशहरा, छठ पूजा और मूर्ति विसर्जन जैसे प्रमुख पर्वों पर यहां हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
रिपोर्ट के अनुसार मंदिर की मुख्य भूमि सार्वजनिक श्रेणी की है तथा परिसर की भूमि किसी भी प्रकार के विवाद से मुक्त है। वर्तमान में मंदिर के प्रबंधक देवेंद्र दास शास्त्री हैं, जबकि महंत सूरजदास व्यवस्थाओं की देखरेख कर रहे हैं।
एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया है कि मंदिर के सामने बहने वाली मनोरमा नदी में बार-बार जलकुंभी फैलने से धार्मिक स्थल की सुंदरता प्रभावित होती है। इसके लिए नदी की नियमित यांत्रिक सफाई तथा जल प्रवाह को सुचारु बनाए जाने की आवश्यकता बताई गई है। माना जा रहा है कि पर्यटन विभाग को भेजी गई इस विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर मखौड़ाधाम के विकास, सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाओं की दिशा में जल्द ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।
