बैड़ारी मुस्तहकम में सचिव महेंद्र कुमार यादव की कथित फर्जी आख्या पर सवाल, ग्रामीणों ने मांगी निष्पक्ष जांच




कुदरहा (बस्ती): विकासखंड कुदरहा की ग्राम पंचायत बैड़ारी मुस्तहकम में नाली निर्माण, जलभराव और सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि समस्याओं का स्थायी समाधान करने के बजाय आईजीआरएस पोर्टल पर औपचारिक और भ्रामक रिपोर्ट लगाकर शिकायतों को बंद किया जा रहा है।

ग्राम निवासी और शिकायतकर्ता उबैदुर्रहमान खान के अनुसार, उन्होंने गांव की जर्जर नाली, गंदे पानी के जमाव और सफाई व्यवस्था को लेकर पिछले कई महीनों में कई बार ऑनलाइन शिकायतें दर्ज कराईं। आरोप है कि प्रत्येक बार मौके की वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच के बजाय पुरानी तस्वीरों या अस्थायी सफाई के आधार पर रिपोर्ट भेज दी जाती है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि जांच के दौरान केवल फोटो खिंचवाने के लिए सफाई कराई जाती है, जबकि नाली की टूट-फूट और जलभराव की मूल समस्या बनी रहती है। इससे ग्रामीणों को गंदगी, दुर्गंध और संक्रमण का खतरा झेलना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि यदि नाली और जलनिकासी व्यवस्था में कोई समस्या नहीं है, तो इसी नाली के लिए पहले ₹1.01 लाख का एस्टीमेट किस आधार पर तैयार किया गया था।

ग्रामीणों का आरोप है कि एक ओर नाली की मरम्मत के लिए एस्टीमेट तैयार किया गया, वहीं दूसरी ओर जांच रिपोर्टों में समस्या से इनकार किया जा रहा है। इन विरोधाभासी दावों से मामले की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, संबंधित मार्ग पर भारी और चार-पहिया वाहनों का लगातार आवागमन रहता है। इससे आरसीसी के ढक्कन बार-बार टूट जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग पर खुली नाली अथवा सामान्य ढक्कन की व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने पक्की अंडरग्राउंड ह्यूम पाइप लाइन बिछाने की मांग की है, ताकि वाहनों की आवाजाही से जलनिकासी प्रभावित न हो।

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारी, बस्ती से मांग की है कि सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) की ओर से भेजी गई रिपोर्ट की दोबारा जांच कराई जाए। साथ ही किसी स्वतंत्र और वरिष्ठ अधिकारी से मौके का स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि निरीक्षण के दौरान नाली की मौजूदा स्थिति, जलभराव, टूटे ढक्कनों, पूर्व तैयार एस्टीमेट और शिकायतकर्ता की तकनीकी ड्राइंग—सभी का मिलान किया जाना चाहिए। यदि जांच में लापरवाही या भ्रामक रिपोर्ट की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

मामले में पंचायत सचिव महेंद्र कुमार यादव का पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। उनका पक्ष मिलने पर खबर में शामिल किया जाएगा।

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