पिता की हत्या के बाद लिया था अन्याय के खिलाफ खड़े होने का संकल्प, आर्थिक कठिनाइयों के बीच UPSC में हासिल की 454वीं रैंक
बस्ती। पिता की हत्या का गहरा सदमा, आर्थिक तंगी और लगातार असफलताओं के बावजूद लक्ष्य से न भटकने की कहानी आज एक बार फिर चर्चा में है। बहादुरपुर विकासखंड के धोबहट गांव निवासी IPS अधिकारी बजरंग प्रसाद यादव के पिता की हत्या के मामले में अदालत द्वारा दोषियों को सजा सुनाए जाने के बाद उनकी संघर्षगाथा एक बार फिर सामने आई है। हालिया अदालती फैसले में मामले के दोषियों को 10-10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाए जाने की खबर सामने आई है।
वर्ष 2020 में किसान पिता राजेश यादव की हत्या के बाद परिवार पर मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़ा। इसी दौर में बजरंग प्रसाद ने अपने जीवन को नई दिशा देने का संकल्प लिया। उन्होंने अन्याय के खिलाफ खड़े होने और समाज के कमजोर एवं जरूरतमंद लोगों की मदद करने के उद्देश्य से सिविल सेवा में जाने का फैसला किया।
आर्थिक परिस्थितियां भी उनके रास्ते की बड़ी चुनौती थीं। पढ़ाई और कोचिंग का खर्च जुटाने के लिए परिवार को अपनी उपज तक बेचनी पड़ी। इसके बावजूद बजरंग प्रसाद ने तैयारी जारी रखी। हिंदी माध्यम से UPSC की तैयारी करते हुए उन्हें शुरुआती प्रयासों में सफलता नहीं मिली। एक प्रयास में वे मुख्य परीक्षा में महज 27 अंकों से पीछे रह गए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
आखिरकार UPSC सिविल सेवा परीक्षा-2022 में उन्होंने 454वीं रैंक हासिल की और IPS के रूप में चयनित हुए। उनकी सफलता की खबर ने उस समय बस्ती के ग्रामीण क्षेत्र में भी विशेष चर्चा बटोरी थी।
बजरंग प्रसाद की प्रशासनिक सेवा की यात्रा भी उल्लेखनीय रही है। वे मेरठ में ASP के रूप में कार्य कर चुके हैं और वर्ष 2026 में इंचौली थाने का प्रभार भी संभाल चुके हैं। हालिया रिपोर्टों में इंचौली थाने में उनके द्वारा पुलिस कार्यों की निगरानी और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में कार्रवाई का उल्लेख मिलता है।
पिता की हत्या के बाद जिस संकल्प के साथ बजरंग प्रसाद ने अपनी यात्रा शुरू की थी, वह आज केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में धैर्य, संघर्ष और लक्ष्य के प्रति दृढ़ता की मिसाल बन चुकी है। अब पिता के हत्यारों को अदालत से सजा मिलने के बाद इस कहानी में न्याय की एक महत्वपूर्ण कड़ी भी जुड़ गई है।