सरकार की बहुप्रचारित "हर घर जल" योजना जिले के विकासखंड बहादुरपुर के पकड़ी छब्बर ग्राम पंचायत में कागज़ों पर पूरी हो चुकी है, लेकिन जमीन पर हकीकत बिलकुल उलट है एक साल से अधिक बीतने के बावजूद न तो टंकी बनी, न पानी आया, और कई परिवार तो योजना की पहुंच से ही बाहर रह गए।
पंचायत के पकड़ी छब्बर और बेलवाडाड़ गांव में करीब ₹2.01 करोड़ की लागत से यह योजना शुरू की गई थी। पाइपलाइन बिछाई गई, कुछ जगहों पर टोटियां भी लगाई गईं, लेकिन ग्रामीण आज तक एक बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
बेलवाडाड़ गांव के पास से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-28 के दोनों ओर बसे लगभग 25-30 घरों तक पाइपलाइन बिछाई ही नहीं गई।
वहां रहने वाले रमेश ने कहा, “हमारे घरों को योजना से बाहर रखा गया है, जबकि हम भी गांव के निवासी हैं। हमें भी साफ पानी का हक है।”
गांव के बीडीसी प्रतिनिधि अशफ़ाक अहमद, शकरून निशा, चंद्रप्रकाश, नन्दलाल, और मालती जैसे कई ग्रामीणों ने बताया कि या तो टोटियां लगी नहीं हैं या लगने के बाद पानी कभी नहीं आया।
ग्राम प्रधान रामफेर का कहना है,“अभी तक पानी की टंकी ही नहीं बनी है, तो सप्लाई कैसे होगी। वैसे भी इस योजना में हमारे स्तर से कोई काम नहीं किया गया है, यह जल निगम की जिम्मेदारी है।”
हैंडपंपों से पीला, गंधयुक्त पानी पीने को मजबूर ग्रामीण अब प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इस योजना की जांच कर कार्रवाई की जाए, ताकि हर घर तक शुद्ध जल पहुंचाया जा सके, न कि सिर्फ बोर्ड पर नाम लिख कर योजना पूरी मान ली जाए।
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