मटेरा का 'पाल चौराहा' बना 'ताल चौराहा', छह साल से नहीं हुई मरम्मत, ग्रामीण बेहाल


बस्ती जनपद के बहादुरपुर ब्लॉक क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला मटेरा गांव आज जर्जर सड़क और प्रशासनिक उपेक्षा का प्रतीक बन गया है। गांव की आबादी करीब 2000 है और यहां का 'पाल चौराहा', जो कि सोनिया घाट, कचुरेघाट और अन्य इलाकों को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है, आज बरसात में तालाब का रूप ले चुका है, जिससे ग्रामीणों ने अब इसे 'ताल चौराहा' कहना शुरू कर दिया है।

इस मार्ग का उपयोग आसपास के 20 गांवों के हजारों लोग प्रतिदिन करते हैं, क्योंकि यह रास्ता विकासखंड मुख्यालय के निकट स्थित है। बावजूद इसके, बीते छह वर्षों से इस सड़क की मरम्मत नहीं हुई है।

मटेरा के निवासी मनोज कुमार, गुड्डू पांडेय, जहीरुल, अब्बारुल और विजय पांडेय ने बताया कि "हर बरसात में यह चौराहा जलभराव से तालाब बन जाता है, जिससे निकलना मुश्किल हो जाता है।" ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग की दुर्दशा से रोजाना स्कूली बच्चों, मरीजों और आम राहगीरों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

ग्राम प्रधान चंदन सिंह ने बताया कि बीते चार वर्षों में कई बार जिलाधिकारी और संबंधित विभाग को पत्र लिखे, साथ ही व्यक्तिगत रूप से अधिकारियों से मुलाकात भी की, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं मिला। उन्होंने कहा कि "हमने हर संभव प्रयास किया लेकिन प्रशासनिक अनदेखी के कारण मटेरा गांव विकास की धारा से वंचित रह गया है।"

गांव के 'पाल चौराहा' की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि लोग अब व्यंग्य में इसे 'ताल चौराहा' कहने लगे हैं। यह सड़क बहादुरपुर से होते हुए कचुरेघाट के रास्ते सोनिया घाट तक जाती है, जो क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पीडब्ल्यूडी विभाग से मांग की है कि तत्काल मरम्मत कर सड़क को चालू हालत में लाया जाए, जिससे लोगों को राहत मिल सके।
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