बस्ती। बहादुरपुर विकासखंड अंतर्गत उमरिया पंचायत के राजस्व गांव मरवटिया में वर्ष 1997-98 में निर्मित पशु सेवा केंद्र आज खंडहर में तब्दील हो चुका है। करोड़ों की लागत से ग्रामीण पशुपालकों को सुविधा देने के उद्देश्य से बना यह भवन निर्माण के बाद कभी उपयोग में नहीं लाया गया।
ग्रामीणों ने बताया कि इस भवन का निर्माण तत्कालीन ग्राम प्रधान मेहिलाल के कार्यकाल में कराया गया था। उस समय यहां के पशुधन प्रसार अधिकारी आर. पी. सिंह उमरिया में किराए के मकान में रहते थे। लेकिन भवन तैयार होने से पहले ही उनका ट्रांसफर कुसौरा हो गया और इसके बाद यह पशु सेवा केंद्र उपेक्षा का शिकार बन गया।
करीब 27 वर्षों से खाली पड़ा यह भवन अब जर्जर हालत में पहुंच गया है और नशेड़ियों का अड्डा बन चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां आए दिन असामाजिक तत्व जमा होते हैं, जिससे स्थानीय लोगों और बच्चों की सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है।
गांव के बुजुर्ग जगदंबिका प्रसाद ने कहा, “भवन बनने के बाद कभी किसी अधिकारी ने यहां ध्यान नहीं दिया। आज यह खंडहर हो चुका है और लोगों के लिए सिरदर्द बन गया है।”
काशी प्रसाद ने बताया, “यदि इस भवन का सही इस्तेमाल होता तो पशुपालकों को इलाज, टीकाकरण और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं गांव में ही मिल जातीं। लेकिन अब हमें ब्लॉक मुख्यालय तक भटकना पड़ता है।”
शारदा प्रसाद और अष्टभुजा प्रसाद ने कहा, “गांव और आस पास की पंचायतों में पशुधन की संख्या अधिक है। ऐसे में पशु सेवा केंद्र का उपयोग न होना दुर्भाग्यपूर्ण है।”
वहीं, अनिल पांडे और जयशंकर ने प्रशासन से मांग की कि “इस भवन का पुनर्निर्माण कर इसे सक्रिय किया जाए ताकि ग्रामीणों को लाभ मिल सके और नशेड़ियों का जमावड़ा भी खत्म हो।”
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस भवन का पुनर्निर्माण और उपयोग सुनिश्चित किया जाए ताकि यह क्षेत्रीय पशुपालकों के लिए सहारा बन सके और असामाजिक गतिविधियों पर भी रोक लगाई जा सके।
इस मामले विकासखण्ड बहादुरपुर के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश वर्मा से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन फोन बंद होने के कारण संपर्क नहीं हो सका।
Tags
बस्ती