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| गौरी-शंकर की पूजा करती महिलाएं |
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया पर हरतालिका तीज के अवसर पर सोमवार को जिले के कलवारी स्थित श्री कालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही महिलाएं श्रृंगार कर मंदिर पहुंचीं और गौरी-शंकर की प्रतिमा के समक्ष विधिविधान से पूजा-अर्चना की।
मंदिर परिसर में केले के पत्तों से मंडप सजाकर व्रतधारी महिलाओं ने निर्जल रहकर भजन-कीर्तन किए और देर रात तक जागरण चला। शिव-पार्वती विवाह की कथा सुनी गई और श्रद्धालुओं ने आरती उतारी।
मंदिर के पुजारी आचार्य संस्कार शास्त्री ने कहा, “हरतालिका तीज माता पार्वती द्वारा भगवान शिव को पाने के लिए रखा गया पहला व्रत है। इस व्रत से स्त्रियों का सुहाग अखंड रहता है और अविवाहित कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है।”
श्रद्धालु जीरा देवी ने बताया कि वे हर साल यह व्रत करती हैं और मानती हैं कि माता पार्वती की कृपा से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। शतरूपा ने कहा कि “तीज का यह व्रत करवाचौथ से भी कठिन है क्योंकि इसमें पूरे दिन निर्जल रहना पड़ता है और व्रत का समापन अगले दिन पूजन के बाद ही होता है।”
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| मंदिर में सहयोग करते पुजारी |
इस अवसर पर प्रतिभा देवी, महिमा, दीपक सहित कई श्रद्धालु भी शामिल रहे। पूजा-अर्चना के बाद भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया और एक-दूसरे को हरतालिका तीज की शुभकामनाएं दीं।
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