| कोरमा गांव में लगा मेला |
बस्ती। विकासखंड कुदरहा के ग्राम कोरमा में कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य मेले ने पूरे क्षेत्र को धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव में रंग दिया। गांव के ब्रह्मस्थान परिसर और पास स्थित शिवशंकर एवं हनुमान मंदिर को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया, जहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही।
मेले में आसपास के गांवों — कोरमा, बरईजोत, मनौआ, सिंगही, तुरकौलिया, कनैला सहित दर्जनों गांवों से लोग जुटे। ब्रह्मस्थान में कृष्ण की सजीव झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। मिठाई, जलेबी, चाट, श्रृंगार, खिलौने और गुब्बारे की दुकानों पर बच्चों और महिलाओं की खूब भीड़ रही। बच्चे हाथों में रंग-बिरंगे गुब्बारे लिए मेले में घूमते नजर आए।
कार्यक्रम में पूर्वांचल की लोकप्रिय लोकनृत्य शैली ‘नाच’ का आयोजन हुआ जिसमें हिंदी - भोजपुरी गानों पर लड़कियां डांस करती दिखाई दीं। दर्शकों की भीड़ देर शाम तक इस प्रस्तुति का आनंद लेती रही।
जयकरन ओझा ने मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना के बीच बताया, “मैं 14 साल की उम्र से यहां पूजा करता आ रहा हूं। भोर तीन बजे हम पति-पत्नी मंदिर पहुंचकर भगवान का आशीर्वाद लेते हैं और शाम को भी नियमित पूजा करते हैं। यह हमारी दिनचर्या का हिस्सा है।”
नरेंद्र कुमार ओझा ने आयोजन के बारे में जानकारी देते हुए कहा, “यह मेला पूरी तरह से ग्रामीणों के सहयोग से होता है। लॉकडाउन के दौरान मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था, तभी से यह जगह और भी आकर्षण का केंद्र बन गई है। मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि सामाजिक मेलजोल और गांवों को जोड़ने का माध्यम भी बन गया है।”
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| लोकनृत्य शैली ‘नाच’ का आयोजन |
कार्यक्रम में कमलेश ओझा, सुरेंद्र ओझा, हरिश्चंद्र, ग्राम प्रधान धर्मेंद्र पटेल, दुर्गेश ओझा सहित कई लोग मौजूद रहे। ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे आयोजन से जहां परंपरा और संस्कृति जीवित रहती है, वहीं सामाजिक एकजुटता भी बढ़ती है।
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