बस्ती जिले के कलवारी क्षेत्र में स्थित करीब 400 साल पुराने कौलेश्वर नाथ मंदिर की पवित्रता और सौंदर्य इन दिनों गंदगी और छुट्टा जानवरों की वजह से प्रभावित हो रही है। मंदिर परिसर में फैली गंदगी और सूअरों के घूमने से श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंच रही है। इस स्थिति को लेकर मंदिर के पुजारी महंत आचार्य संस्कार दास ने गहरी नाराजगी और पीड़ा व्यक्त की है।
महंत आचार्य संस्कार दास ने आरोप लगाया कि मंदिर की साफ-सफाई और उसके संरक्षण को लेकर न तो ग्राम प्रधान और न ही क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने कोई ठोस कदम उठाया है। उन्होंने बताया कि मंदिर के आसपास के कुछ स्थानीय लोगों ने सूअर पाल रखे हैं, जिन्हें खुले में छोड़ दिया जाता है। यही सूअर पूरे दिन मंदिर परिसर और आसपास घूमते रहते हैं और गंदगी फैलाते हैं। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को काफी असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है।
महंत का कहना है कि मंदिर में अक्सर शादी-विवाह के रिश्ते देखने के लिए भी लोग आते हैं, लेकिन परिसर में फैली गंदगी और जानवरों के कारण उन्हें शर्मिंदगी और असुविधा महसूस होती है। इसके अलावा, मंदिर परिसर में लगाए गए फूल-पौधे भी बकरियों के कारण पनप नहीं पा रहे हैं, जिससे मंदिर की सुंदरता प्रभावित हो रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि मंदिर में नियमित सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। मजबूरन मंदिर की सफाई का जिम्मा खुद उन्हें ही उठाना पड़ता है। इस कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या भी धीरे-धीरे कम होती दिखाई दे रही है।
मंदिर में दर्शन करने आए श्रद्धालु ललित यादव ने भी इस स्थिति की कड़ी निंदा की और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि इतने प्राचीन और आस्था के केंद्र मंदिर की यह स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
महंत आचार्य संस्कार दास और स्थानीय श्रद्धालुओं ने प्रशासन व सरकार से मांग की है कि मंदिर के चारों ओर मजबूत चारदीवारी बनवाई जाए और नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि मंदिर की स्वच्छता, पवित्रता और भव्यता बरकरार रह सके। उनका कहना है कि मंदिर का सम्मान ही हिंदू आस्था का सम्मान है और इसके संरक्षण के लिए तत्काल कदम उठाना जरूरी है।
