आवारा पशुओं से त्रस्त किसान, फसलें चौपट—हाइवे पर हादसों का खतरा बढ़ा

 




कलवारी, बस्ती।
कलवारी क्षेत्र में आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या अब किसानों और राहगीरों के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग 28 के दोनों ओर बसे गांवों में सैकड़ों की संख्या में घूम रहे गोवंश फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे किसानों में भारी नाराजगी है।

स्थानीय निवासी राम कुमार ने बताया कि “आवारा पशु दिन-रात खेतों में घुसकर फसल बर्बाद कर रहे हैं, जिससे मेहनत पर पानी फिर रहा है।” वहीं बहादुरपुर क्षेत्र के गन्ना किसान प्रतिनिधि रामकृष्ण पटेल ने कहा कि यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि “बड़े पशु कई बार आक्रामक हो जाते हैं, जिससे जानलेवा हादसों का खतरा भी बना रहता है।”

शेखपुरा, पड़री, कनैला, बेलवाडाड़, पकड़ी छब्बर, बरईजोत और जिगिनिया सहित कई गांव इस समस्या से प्रभावित हैं। किसानों का कहना है कि खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो रही हैं, जिससे आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

स्थिति केवल खेती तक सीमित नहीं है। हाइवे पर आवारा पशुओं की मौजूदगी के कारण सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई बार वाहन पशुओं से टकरा चुके हैं, जिससे गंभीर हादसे होते-होते बचे हैं।

मोहम्मद असलम, अनिल, संदीप पांडेय, दिनेश और शत्रुघ्न चौधरी सहित अन्य किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि आवारा पशुओं को पकड़कर गौशालाओं में भेजा जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो समस्या और विकराल रूप ले सकती है।

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