दिलीप कुमार। बहादुरपुर बस्ती ।
बस्ती जनपद के बहादुरपुर ब्लॉक से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कलवारी क्षेत्र के मखदुमपुर निवासी अब्दुर रहीम पिछले कई महीनों से चकरोड की समस्या को लेकर दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन समाधान आज तक नहीं मिला।
मामला ग्राम पंचायत खलीलपट्टी के ग्राम खरिका भारी का है, जहां खेतों तक जाने वाला चकरोड राजस्व अभिलेखों में दर्ज होने के बावजूद जमीनी स्तर पर बदहाल स्थिति में है। गाटा संख्या 113, 112, 153 और 144 में दर्ज इस चकरोड का लेखपाल द्वारा सीमांकन भी किया जा चुका है। इसके बावजूद अतिक्रमण और खराब हालत के चलते किसान खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। बरसात के समय यह समस्या और भयावह हो जाती है।
अब्दुर रहीम ने बताया कि उन्होंने बीते वर्ष के ग्राम प्रधान को लिखित आवेदन देकर चकरोड पटवाने की मांग की थी। पहले आश्वासन मिला, लेकिन बाद में साफ इनकार कर दिया गया। सबसे सनसनीखेज आरोप यह है कि उन्हें यह तक कह दिया गया—“तुम्हारे गांव से वोट नहीं मिलता, इसलिए काम नहीं होगा।”
वहीं, जब इस पूरे मामले में बीडीओ घिसम प्रसाद से बात की गई, तो उन्होंने जिम्मेदारी ग्राम प्रधान पर डालते हुए कहा कि “प्रधान अपने पंचायत के कार्य कराने के लिए स्वतंत्र है।” इस बयान ने और भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर जिम्मेदारी किसकी है और आम जनता न्याय के लिए कहां जाए?
राजस्व विभाग द्वारा स्वीकृति और सीमांकन के बावजूद कार्य का लटकना प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है। पीड़ित लगातार ब्लॉक कार्यालय के चक्कर काट रहा है, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही।
ग्रामीणों में इसको लेकर भारी आक्रोश है और उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन किया जाएगा। अब देखना यह है कि यह मामला कब तक फाइलों में दबा रहेगा या पीड़ित को न्याय मिलेगा।
