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| सुखी नहर की सफाई |
बहादुरपुर, बस्ती। करीब 20 साल पहले बनी सुभावपुर (कुदरहा) से सोंधीया घाट और कनैला की ओर जाने वाली नहर आज भी किसानों के लिए केवल उम्मीद बनकर रह गई है। दो दशक बीत जाने के बावजूद नहर में सिंचाई के लिए पानी नहीं पहुंच सका है, जबकि हर वर्ष इसकी साफ-सफाई पर बड़ी धनराशि खर्च की जाती रही है।
क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों में इसे लेकर नाउम्मीदी साफ दिखाई दे रही है। उनका कहना है कि वर्षों से सफाई पर खर्च हो रहे पैसे यदि किसानों को ही उपलब्ध करा दिए जाते, तो उनकी सिंचाई की लागत कम होती और वे अपने टैक्स के पैसे का सदुपयोग होते देख पाते।
यह नहर शेखपुरा, कनैला खास, विशेनपुर, लोनहा और रामपुर ग्राम पंचायतों से होकर गुजरती है। किसानों का कहना है कि यदि नहर में पानी आता तो क्षेत्र की खेती को बड़ा सहारा मिलता और हजारों बीघा भूमि की सिंचाई संभव हो पाती।
हालांकि, इस बार नहर में पानी पहुंचाने की दिशा में एक बार फिर प्रयास शुरू किए गए हैं। सिंचाई विभाग की ओर से जेसीबी मशीनों के जरिए नहर में उगी सरकंडे और झाड़ियों की सफाई कराई जा रही है, ताकि भविष्य में पानी के प्रवाह में कोई बाधा न आए।
सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता राज नारायण तिवारी ने बताया कि पिछले वर्ष भी प्रयास किया गया था, लेकिन सिंचाई योग्य पानी नहर तक नहीं पहुंच पाया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष नदी में जलस्तर बढ़ने के बाद जुलाई के आसपास नहर में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होने की उम्मीद है। वर्तमान में नहर की झाड़ियों की साफ-सफाई का कार्य कराया जा रहा है और सरकंडों को हटाया जा रहा है, जिससे भविष्य में नहर पानी ले जाने योग्य बनी रहे।
अब क्षेत्र के किसानों की निगाहें मानसून और विभागीय प्रयासों पर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि दो दशक के इंतजार के बाद इस बार नहर में पानी जरूर पहुंचेगा।
